Monday, September 25, 2017

भगवती वंदना


अति दूर सं आयल अकिंचन हम बटोही द्वार पर
विनती करू स्वीकार माँ कर जोड़ि दूनू ठाढ़ छी

काली अहीं, दुर्गा अहीं, तारा अहीं हे अम्बिके
श्यामा अहीं, गौरी अहीं, छी माँ अहीं अम्बालिके
हे सिंहवाहिनि अहीं सृष्टिक गति अहीं संहार छी
विनती करू स्वीकार.....

छी शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणि नाम सं वन्दित अहीं
छी सिद्धिधात्री, कूष्मांडा रूप में पूजित अहीं
कात्यायिनी माँ अहीं जीवन सृष्टि केर आधार छी
विनती करू स्वीकार.....

स्कंदमाता, महागौरी रूप में चर्चित अहीं
छी कालरात्रि, चंद्रघंटा रूप में अर्चित अहीं
नौ रूप नवदुर्गा कहाबय, सभक तारणहार छी..
विनती करू स्वीकार.....




Saturday, March 11, 2017

फगुआ

एक बरख केर बादे आओत फेर ई पावनि फगुआ
कोनटा धयने की बैसल छैं  रे बुरबक दिनजरुआ

मलपूआ तरकारी संगहि दहि -बाड़ा  केर योग
काजू किसमिस किदन कहांदन छप्पन तरहक भोग
सबटा पाबि निकललहुँ फेर ऊपर सS दS भंगगोला
हाथ में रंगक पोटली छल, संग संगी साथिक टोला

बाबा-बाबी, काका-काकी सब भैया ओ भौजी
कियो ने छोड़लनि, ऊपर-नीचा रंगा गेलहुँ हम औ जी
हमहूँ बयसक अनुपाते में सबके रंग लगयलहुँ
टोल भरिक सगरो भौजी में अप्पन धाख जमयलहुँ

छोटका-मोटका ननकिरबा सब केर छल अप्पन टोली
घूमि - घूमि  क खेला रहल छल सब अपना में होली
हमरो पड़ि  गेल  मोन, कोना उत्पात करी नेना में
रही हम सेनापति पद पर उत्पाती सेना में

एही हुड़दंगक चक्कर में हम बड़ मारि  खेने छी
मुदा ने फगुआ में तें आई धरि  कहिओ दम्म धेने छी
रंग खेलेबा में नहि बाबू हमरा स क्यौ  अगुआ
कोनटा..........................................................


पहिलुक बेर केर बात कहै छी गेल रही हम सासुर
सार-सारि  सरहोइजक  सेना रंग लगब लेल आतुर
सर्वप्रथम अप्पन "हे यै" केर हम आवाज़ लगौलहुँ 
मुदा भरल सासुर में अपनहि अप्पन नाम हसौलहुँ

कनियाँ हमरो बीस छली धरि चालाकी में भाई
ककरो लग नहि कहबै ई गप जे कहैत छी आई
सुतले में भरि इच्छा हमरा लगा खूब कय  रंग
छली निपत्ता भोरहरबे सं संगी साथिक  संग

अपने मुँह छल भेल तेहन जे एखनहुँ हंसी लगैय
कहलक सार कहू यौ ओझा "आब मोन केहन लगैय"
एहि दिस एकसर छलहुँ हम, ओहि दिस सासुर सेनानी
तखनो सबके मोन पाड़ि देलियनि हम हुनकर नानी

की नहि  भीजल, की नहि तीतल, की नहि रंगहि  रंगा गेल
कोन सेहन्ता बाँचल छल जे ओहि दिन नहि पूरा भेल
एखनो धरि अछि मोन मीत रौ  सासुक हाथक तरुआ
कोनटा............................ 

Tuesday, November 8, 2016

भारतवर्ष

हिंदुस्तान कही वा भारत वा की जम्बूद्वीप
आब कहै छी इंडिया सब क्यौ सेहो चलू छै ठीक
चिड़ै छलै सोनाक देश कहबै छल आर्यावर्त हमर
सकल विश्व में, अद्भुत अनुपम ई थिक भारतवर्ष हमर

बालक भरत जाहिठाँ बाघक मुँह केर दांत गनै  छथि
कृष्ण जाहिठाँ  नागक फन पर जा क नृत्य करै छथि
भीष्म जाहिठाँ शरशय्या पर मासक मास रहै  छथि
राम जाहिठाँ वचनपूर्ति लेल सब किछु त्याग करै  छथि
विश्व कहत, देखबै एक दिन जे भारत थिक आदर्श हमर
सकल विश्व में अद्भत,अनुपम............

राणा प्रताप वा होथि शिवाजी वा की बाजीराव
वा पृथ्वीराज-चंदवरदाई केर हम कथा सुनाऊ
भगत सिंह, आज़ाद, सावरकर, रानी लक्ष्मीबाई
देशक हित बलिदान देलनि जे सबहि पूज्य छथि आई
सब महान सेनानी केर अछि सादर चरण स्पर्श हमर
सकल विश्व में अद्भुत, अनुपम......

मानल गाँधी, बुद्ध महावीरक छी हम अनुयायी
मुदा माथ पर चढ़ि नाचब त हमहूँ आतातायी
भूमिक टुकड़ी हेतै आन लेल, हम्मर भारतमाता
देश अपन अछि हमही सब छी भारत भाग्य विधाता
ई चुटपुजिया नेता सब नै दबा सकत संघर्ष हमर
सकल विश्व में सब स अनुपम....

Thursday, April 30, 2015

भूकंप

डोलल धरती आयल भूकंप
सगरो नगर मचल हड़कंप

बच्चा, बूढ़, जवान हो किंवा
चिड़ी चुनमुनी कीट फतिंगा
डोलि रहल छल जेना मतंग

जे जहिठां छल बाहर भागल
प्राण सभक छल उपरे टांगल
धरती फाटल बनल सुरंग

तोहरे कSहल जग भरि मानय
तों हीं सब किछु के नहीं जानय
कियS उठौलहक एहन तरंग 

Thursday, October 30, 2014

आत्मश्लाघा

पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ
गुणगान करइ जाउ औ प्रणाम करइ जाउ

कतेक काज कयल हम मैथिलीक लेल
हमरा नहि चिन्हय से छुच्छ बकलेल
की सब कयलहुँ हम बखान करइ जाउ
पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ

हम बजैत छी जे अछि ततबे टा सत्य
अनकर बजबा केर कि कोनो महत्व
ऐना बैसू जुनि हमर मानदान करइ जाउ
पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ

पुरस्कार पयबा केर हमरो अछि लौल
धिया-पुता घर में अछि कयने किलोल
पारितोषिक के अपनहि दोकान करइ जाउ
पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ

Monday, October 14, 2013

प्रेम

प्रेम
आब रहि गेल अछि
शब्द्कोशक कोनो पन्ना पर अंकित
एकटा शब्द मात्र

जे वास्तविकता में
तहिना पाओल जाईत अछि
जेना "म्यूजियम" में राखल
कोनो वस्तु

जS कतहु देखा पड़ैत छैक
प्रेम आई
तS मात्र कागतक फूल जेकाँ
जे देखनहुर तS होइत छैक
मुदा गंधहीन
जे फूल रहितो फूल नहिं थीक


Saturday, October 12, 2013

बखरा अप्पन बाँटि लिय...

मन पड़ैत अछि, एक्कहि थारी में नेना में खयल करथि
हमरा अपने हाथ नहाबथि, अपने तखन नहायल करथि
जे कपड़ा-लत्ता तक में कहिओ नहीं कहलनि छाँटि लिय
से कहैत छथि आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

कथी- कथी के बखरा लगतै तकरो लिस्ट भेल तैयार
आँगन, बाड़ी, कोठली चौकी, सब बंटबाक भेलई नेयार
हम कहलियनि स्मृति सेहो आई धरिक सब छाँटि लिय
ओ कह्लनि जे आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

हम कहलियनि की बाँटब ई घास-फूस आ आक-धथुर
थोड़-बहुत होइते रहैत छै संबंधो में तीत मधुर
माय-बापक हम प्रेम कोना कS आधा आधा राखि लिय
ओ कह्लनि जे आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

सजल नेत्र जे माय-बापक छल कोना कS बंटितहुं अहीं कहू
एतबा दिनका प्रेम अहंक जे कोना कS बंटितहुं अहीं कहू
अपना पर अधिकार ने छीनू, हमरो सबटा राखि लिय
ओ कह्लनि जे आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.