Friday, April 19, 2013

ग़ज़ल (जकरा जतबा लहि जाइत अछि )

22 22 22 22
किछुओ संगे नहि जाइत अछि
एहीठां सब रहि जाइत अछि

हम कतबो किछु लीखी तैयो
कागत सादे रहि जाइत अछि

जतबा जे किछु सुख अरजल से
नोरे संग सब बहि जाइत अछि

कतबो पैघ महल हो एक दिन
समयक आगाँ ढहि जाइत अछि

कतबो सुमिरन करी, प्रार्थना
आब ओतय धरि नहीं जाइत अछि

आई समय ओकरे होईत छै
जकरा जतबा लहि जाइत अछि


2 comments:

  1. आइ समय ओकरे होइतछै
    जकरा जतबा लहि जाइत छै
    वर्तमान समयक यथार्थक नीक प्रस्तुति

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद...

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