Friday, April 19, 2013

ग़ज़ल (जकरा जतबा लहि जाइत अछि )

किछुओ ने संगहि जाइत अछि
सबटा एहिठां रहि जाइत अछि

हम कतबो किछु लीखि  लिअ
ई कागत सादे रहि जाइत अछि

जतबा जे किछु सुख अरजल से
नोरे संग सब बहि जाइत अछि

कतबो बड़का महल बना ली
समय अबै छै ढहि जाइत अछि

सबहक दुख नहि जानि किए
हमरा बसात सब कहि जाइत अछि

कतबो सुमिरन करी, प्रार्थना
आब ओतय धरि नहीं जाइत अछि

आई समय ओकरे होईत छै
जकरा जतबा लहि जाइत अछि


2 comments:

  1. आइ समय ओकरे होइतछै
    जकरा जतबा लहि जाइत छै
    वर्तमान समयक यथार्थक नीक प्रस्तुति

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद...

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