Saturday, June 15, 2013

जीवन-मृत्यु

की थिक जिनगी, मृत्यु कथी थिक, के बूझलक ई सत्य
बड़का बड़का ज्ञानी पंडित केर अपन छनि  कथ्य

के छी  हमसब, किए अबै छी ,
                              जे करैत छी , किए करै छी
किछुए दिन छी, मर्त्यलोक में ,
                             प्रतिदिन ओहि लय किए मरै छी
एहि जिनगी केर बाद कथी छै , तकर न कोनो तथ्य
बड़का बड़का ज्ञानी...


ईश्वर छथि  त ' कत ' रहै छथि
                               किए ने ककरो कष्ट हरै छथि
मुदा ने छथि संसार एते टा
                              कहू तखन जे के चलबै छथि
सबटा फेरो लटपटायल अछि , नहिं जानी की सत्य
बड़का बड़का ज्ञानी...


एही गुनधुन में हम मातल 
                              मूर्ख अपन हम जिनगी काटल 
पैघ लोक सब बड़ ज्ञानी सब 
                              हम बुरबक हम बेकूफ छाँटल 
केयो निकालू हमरा, हम छी फंसल विचारे मध्य 
बड़का बड़का ज्ञानी...

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