Thursday, April 30, 2015

भूकंप

डोलल धरती आयल भूकंप
सगरो नगर मचल हड़कंप

बच्चा, बूढ़, जवान हो किंवा
चिड़ी चुनमुनी कीट फतिंगा
डोलि रहल छल जेना मतंग

जे जहिठां छल बाहर भागल
प्राण सभक छल उपरे टांगल
धरती फाटल बनल सुरंग

तोहरे कSहल जग भरि मानय
तों हीं सब किछु के नहीं जानय
कियS उठौलहक एहन तरंग 

Thursday, October 30, 2014

आत्मश्लाघा

पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ
गुणगान करइ जाउ औ प्रणाम करइ जाउ

कतेक काज कयल हम मैथिलीक लेल
हमरा नहि चिन्हय से छुच्छ बकलेल
की सब कयलहुँ हम बखान करइ जाउ
पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ

हम बजैत छी जे अछि ततबे टा सत्य
अनकर बजबा केर कि कोनो महत्व
ऐना बैसू जुनि हमर मानदान करइ जाउ
पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ

पुरस्कार पयबा केर हमरो अछि लौल
धिया-पुता घर में अछि कयने किलोल
पारितोषिक के अपनहि दोकान करइ जाउ
पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ

Monday, October 14, 2013

प्रेम

प्रेम
आब रहि गेल अछि
शब्द्कोशक कोनो पन्ना पर अंकित
एकटा शब्द मात्र

जे वास्तविकता में
तहिना पाओल जाईत अछि
जेना "म्यूजियम" में राखल
कोनो वस्तु

जS कतहु देखा पड़ैत छैक
प्रेम आई
तS मात्र कागतक फूल जेकाँ
जे देखनहुर तS होइत छैक
मुदा गंधहीन
जे फूल रहितो फूल नहिं थीक


Saturday, October 12, 2013

बखरा अप्पन बाँटि लिय...

मन पड़ैत अछि, एक्कहि थारी में नेना में खयल करथि
हमरा अपने हाथ नहाबथि, अपने तखन नहायल करथि
जे कपड़ा-लत्ता तक में कहिओ नहीं कहलनि छाँटि लिय
से कहैत छथि आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

कथी- कथी के बखरा लगतै तकरो लिस्ट भेल तैयार
आँगन, बाड़ी, कोठली चौकी, सब बंटबाक भेलई नेयार
हम कहलियनि स्मृति सेहो आई धरिक सब छाँटि लिय
ओ कह्लनि जे आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

हम कहलियनि की बाँटब ई घास-फूस आ आक-धथुर
थोड़-बहुत होइते रहैत छै संबंधो में तीत मधुर
माय-बापक हम प्रेम कोना कS आधा आधा राखि लिय
ओ कह्लनि जे आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

सजल नेत्र जे माय-बापक छल कोना कS बंटितहुं अहीं कहू
एतबा दिनका प्रेम अहंक जे कोना कS बंटितहुं अहीं कहू
अपना पर अधिकार ने छीनू, हमरो सबटा राखि लिय
ओ कह्लनि जे आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

Thursday, August 29, 2013

सुनू देश ई कानि रहल अछि

पिछरि- पिछरि क खसय रुपैया, महगी करबय ताता – थैया

अर्थशास्त्र केर बड़का बड़का  पंडित के ने गुदानि रहल अछि

                                                   सुनू देश ई कानि रहल अछि



सबतरि उत्पीड़न केर घटना, मुंबई, दिल्ली वा हो पटना
धंसल वासना केर दलदल में लोक, लाज नहीं मानि रहल अछि
                                    सुनू देश ई कानि रहल अछि


बेसी नेता चोर-उचक्का, तें उतरल अछि देशक चक्का

लुटबा लेल छुटपुजियो नेता सब क्यौ समय अकानि रहल अछि

                                                सुनू देश ई कानि रहल अछि




 

Tuesday, August 20, 2013

विवशता


जखन पहुंचल छल
जीवनक ओहि मोड़ पर
जाहिठाम पसरल छलैक
युवावस्थाक सुगंध
आ जाहिठाम सं फुटकैत छलैक
अनेक बाट


ओकरा
नहि भेल छलैक देरी
निर्णय लएबा मे

चट दss लेने छल
पोथीक बाट
ओ पढ़ि गेल छल
गाँधी आ भगत सिंहक कथा,
आद्यांत स्वतंत्रता संग्राम
आ चाटि गेल छल अनेक रास रेवोल्यूशन
ओकर उत्पत्ति स अंत धरि

आब स्पष्ट भs गेल छलैक  
ओकर नजरि
देखा रहल छलैक
समाज मे पसरल अनेक भेद

सोचलक जे
"क्रान्ति" कर
लाठी खाय
धरना दे
जहल जायत
नहि करत चाकरी कोनो सरकारक
आ ने पकड़त
कोनो धन्ना सेठक पैर

मुदा तखनहि स्मृति
सागरक लहरि जकाँ
आबि ओकरा भिजा जाइत छैक

मन पड़ि जाइत छैक
बाबा-बाबीक सजल आंखि
माइक दवाई केर खाली शीशी
बाबूक कर्ज
बहिनक बियाह लेल
ओरियानक नाम पर
राखल मनोरथ

थम्हि जाइत अछि
राखय लगैत अछि
भारी मन सं,
चौपेति
अपनहि हाथें ईस्त्री कयल “क्रान्ति”

Saturday, June 15, 2013

जीवन-मृत्यु

की थिक जिनगी, मृत्यु कथी थिक, के ई बूझि सकल अछि
जिज्ञासु मन हमरा सं सदिखन ई पूछि रहल अछि 

के छी  हमसब, किए अबै छी ,
                              जे करैत छी , किए करै छी
किछुए दिन छी, मर्त्यलोक में ,
                             प्रतिदिन ओहि लय किए मरै छी
एहि जिनगी केर बाद कथी थिक , क्यौ की देखि सकल अछि
जिज्ञासु मन हमरा सं....


ईश्वर छथि  त ' कत ' रहै छथि
                               किए ने सबहक कष्ट हरै छथि
मुदा ने छथि संसार एते टा
                              कहू तखन जे के चलबै छथि
प्रश्न शिथिल कयने जाइत अछि, किछु नई सूझि रहल अछि
जिज्ञासु मन हमरा सं....


एही गुनधुन में हम मातल 
                              मूर्ख अपन हम जिनगी काटल 
पैघ लोक सब बड़ ज्ञानी सब 
                              मानल हम छी बेकूफ छाँटल
मुदा निरुत्तर सबठाँ सं कविमन ई घूरि चुकल अछि  
जिज्ञासु मन हमरा सं....