Saturday, December 8, 2018

प्रवासी

पेट जखन
भारी पड़य लगैत छैक
प्रेम पर
त' डेग स्वतः
निकलि जाइत छैक
दानाक ताक में

ट्रेन छोड़ैत चलि जाइत छैक
स्टेशन
आ छूटल चल जाइत अछि
अपन
माटि-पानि , गाछ-वृच्छ
घर-दुआरि

स्टेशन केर अंतिम छोर धरि आबि
ठमकि जाइत छथि
संगी-साथी
भाय-बहिन, माय-बाप
बाबा-बाबी
आ नुका लैत  छथि
अपन-अपन
नोरायल आँखि

संग में नेने चलि अबैत छी
मनक पौती में
ओरिआओल
स्मृति मात्र
जकरा देखि
नै जानि कतेक बेर
बीच ऑफिस में, कॉलेज में
लोक लाजक कारणे
पीबि लैत छी
अपनहि नोर

समय अपन चालि चलैत कहैत अछि
ई लिय' "शह"
आ अपना लोकनि
अपन-अपन "मात" बचयबाक
युक्ति सोचय में लागल रहैत छी
अनवरत



  

Monday, September 25, 2017

भगवती वंदना


अति दूर सं आयल अकिंचन हम बटोही द्वार पर
विनती करू स्वीकार माँ कर जोड़ि दूनू ठाढ़ छी

काली अहीं, दुर्गा अहीं, तारा अहीं हे अम्बिके
श्यामा अहीं, गौरी अहीं, छी माँ अहीं अम्बालिके
हे सिंहवाहिनि अहीं सृष्टिक गति अहीं संहार छी
विनती करू स्वीकार.....

छी शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणि नाम सं वन्दित अहीं
छी सिद्धिधात्री, कूष्मांडा रूप में पूजित अहीं
कात्यायिनी माँ अहीं जीवन सृष्टि केर आधार छी
विनती करू स्वीकार.....

स्कंदमाता, महागौरी रूप में चर्चित अहीं
छी कालरात्रि, चंद्रघंटा रूप में अर्चित अहीं
नौ रूप नवदुर्गा कहाबय, सभक तारणहार छी..
विनती करू स्वीकार.....




Saturday, March 11, 2017

फगुआ

एक बरख केर बादे आओत फेर ई पावनि फगुआ
कोनटा धयने की बैसल छैं  रे बुरबक दिनजरुआ

मलपूआ तरकारी संगहि दहि -बाड़ा  केर योग
काजू किसमिस किदन कहांदन छप्पन तरहक भोग
सबटा पाबि निकललहुँ फेर ऊपर सS दS भंगगोला
हाथ में रंगक पोटली छल, संग संगी साथिक टोला

बाबा-बाबी, काका-काकी सब भैया ओ भौजी
कियो ने छोड़लनि, ऊपर-नीचा रंगा गेलहुँ हम औ जी
हमहूँ बयसक अनुपाते में सबके रंग लगयलहुँ
टोल भरिक सगरो भौजी में अप्पन धाख जमयलहुँ

छोटका-मोटका ननकिरबा सब केर छल अप्पन टोली
घूमि - घूमि  क खेला रहल छल सब अपना में होली
हमरो पड़ि  गेल  मोन, कोना उत्पात करी नेना में
रही हम सेनापति पद पर उत्पाती सेना में

एही हुड़दंगक चक्कर में हम बड़ मारि  खेने छी
मुदा ने फगुआ में तें आई धरि  कहिओ दम्म धेने छी
रंग खेलेबा में नहि बाबू हमरा स क्यौ  अगुआ
कोनटा..........................................................


पहिलुक बेर केर बात कहै छी गेल रही हम सासुर
सार-सारि  सरहोइजक  सेना रंग लगब लेल आतुर
सर्वप्रथम अप्पन "हे यै" केर हम आवाज़ लगौलहुँ 
मुदा भरल सासुर में अपनहि अप्पन नाम हसौलहुँ

कनियाँ हमरो बीस छली धरि चालाकी में भाई
ककरो लग नहि कहबै ई गप जे कहैत छी आई
सुतले में भरि इच्छा हमरा लगा खूब कय  रंग
छली निपत्ता भोरहरबे सं संगी साथिक  संग

अपने मुँह छल भेल तेहन जे एखनहुँ हंसी लगैय
कहलक सार कहू यौ ओझा "आब मोन केहन लगैय"
एहि दिस एकसर छलहुँ हम, ओहि दिस सासुर सेनानी
तखनो सबके मोन पाड़ि देलियनि हम हुनकर नानी

की नहि  भीजल, की नहि तीतल, की नहि रंगहि  रंगा गेल
कोन सेहन्ता बाँचल छल जे ओहि दिन नहि पूरा भेल
एखनो धरि अछि मोन मीत रौ  सासुक हाथक तरुआ
कोनटा............................ 

Tuesday, November 8, 2016

भारतवर्ष

हिंदुस्तान कही वा भारत वा की जम्बूद्वीप कही
फलाँ कहै छथि इंडिया मानल सेहो चलू छै ठीक कही
चिड़ै छलै सोनाक देश कहबै छल आर्यावर्त अपन
सकल विश्व में, अद्भुत अनुपम ई थिक भारतवर्ष अपन

बालक भरत जाहिठाँ बाघक मुँह केर दांत गनै छथि
कृष्ण जाहिठाँ नागक फन पर जा क नृत्य करै छथि
भीष्म जाहिठाँ शरशय्या पर मासक मास रहै छथि
राम जाहिठाँ वचनपूर्ति लेल सब किछु त्याग करै छथि
विश्व कहत, देखबै एक दिन जे भारत थिक आदर्श अपन
सकल विश्व में अद्भत,अनुपम............

पृथ्वीराज-चंदवरदाई वा कि होथि शिवाजी
महाराणा प्रताप वा बाजीरावक कथा सुनाबी
भगत सिंह, आज़ाद, बोस वा रानी लक्ष्मीबाई कही
देशक हित बलिदान देलनि जे सभक स्वप्न साकार करी
सब महान सेनानी केर अछि सादर चरण स्पर्श अपन
सकल विश्व में अद्भुत, अनुपम......

मानल गाँधी, बुद्ध महावीरक छी हम अनुयायी
मुदा माथ पर चढ़ि नाचब त हमहूँ आतातायी
भूमिक टुकड़ी हेतै आन लेल, हम्मर भारतमाता
देश अपन अछि हमही सब छी भारत भाग्य विधाता
मिलिजुलि आगाँ बढ़ब तखन के मेटा सकत उत्कर्ष अपन
सकल विश्व में सब स अनुपम....

Thursday, April 30, 2015

भूकंप

डोलल धरती आयल भूकंप
सगरो नगर मचल हड़कंप

बच्चा, बूढ़, जवान हो किंवा
चिड़ी चुनमुनी कीट फतिंगा
डोलि रहल छल जेना मतंग

जे जहिठां छल बाहर भागल
प्राण सभक छल उपरे टांगल
धरती फाटल बनल सुरंग

तोहरे कSहल जग भरि मानय
तों हीं सब किछु के नहीं जानय
कियS उठौलहक एहन तरंग 

Thursday, October 30, 2014

आत्मश्लाघा

पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ
गुणगान करइ जाउ औ प्रणाम करइ जाउ

कतेक काज कयल हम मैथिलीक लेल
हमरा नहि चिन्हय से छुच्छ बकलेल
की सब कयलहुँ हम बखान करइ जाउ
पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ

हम बजैत छी जे अछि ततबे टा सत्य
अनकर बजबा केर कि कोनो महत्व
ऐना बैसू जुनि हमर मानदान करइ जाउ
पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ

पुरस्कार पयबा केर हमरो अछि लौल
धिया-पुता घर में अछि कयने किलोल
पारितोषिक के अपनहि दोकान करइ जाउ
पाग दोपटा सँ हम्मर सम्मान करइ जाउ

Monday, October 14, 2013

प्रेम

प्रेम
आब रहि गेल अछि
शब्द्कोशक कोनो पन्ना पर अंकित
एकटा शब्द मात्र

जे वास्तविकता में
तहिना पाओल जाईत अछि
जेना "म्यूजियम" में राखल
कोनो वस्तु

जS कतहु देखा पड़ैत छैक
प्रेम आई
तS मात्र कागतक फूल जेकाँ
जे देखनहुर तS होइत छैक
मुदा गंधहीन
जे फूल रहितो फूल नहिं थीक


Saturday, October 12, 2013

बखरा अप्पन बाँटि लिय...

मन पड़ैत अछि, एक्कहि थारी में नेना में खयल करथि
हमरा अपने हाथ नहाबथि, अपने तखन नहायल करथि
जे कपड़ा-लत्ता तक में कहिओ नहीं कहलनि छाँटि लिय
से कहैत छथि आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

कथी- कथी के बखरा लगतै तकरो लिस्ट भेल तैयार
आँगन, बाड़ी, कोठली चौकी, सब बंटबाक भेलई नेयार
हम कहलियनि स्मृति सेहो आई धरिक सब छाँटि लिय
ओ कह्लनि जे आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

हम कहलियनि की बाँटब ई घास-फूस आ आक-धथुर
थोड़-बहुत होइते रहैत छै संबंधो में तीत मधुर
माय-बापक हम प्रेम कोना कS आधा आधा राखि लिय
ओ कह्लनि जे आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

सजल नेत्र जे माय-बापक छल कोना कS बंटितहुं अहीं कहू
एतबा दिनका प्रेम अहंक जे कोना कS बंटितहुं अहीं कहू
अपना पर अधिकार ने छीनू, हमरो सबटा राखि लिय
ओ कह्लनि जे आब भैयारी, बखरा अप्पन बाँटि लिय.

Thursday, August 29, 2013

सुनू देश ई कानि रहल अछि

पिछरि- पिछरि क खसय रुपैया, महगी करबय ताता – थैया

अर्थशास्त्र केर बड़का बड़का  पंडित के ने गुदानि रहल अछि

                                                   सुनू देश ई कानि रहल अछि



सबतरि उत्पीड़न केर घटना, मुंबई, दिल्ली वा हो पटना
धंसल वासना केर दलदल में लोक, लाज नहीं मानि रहल अछि
                                    सुनू देश ई कानि रहल अछि


बेसी नेता चोर-उचक्का, तें उतरल अछि देशक चक्का

लुटबा लेल छुटपुजियो नेता सब क्यौ समय अकानि रहल अछि

                                                सुनू देश ई कानि रहल अछि




 

Tuesday, August 20, 2013

विवशता


जखन पहुंचल छल
जीवनक ओहि मोड़ पर
जाहिठाम पसरल छलैक
युवावस्थाक सुगंध
आ जाहिठाम सं फुटकैत छलैक
अनेक बाट


ओकरा
नहि भेल छलैक देरी
निर्णय लएबा मे

चट दss लेने छल
पोथीक बाट
ओ पढ़ि गेल छल
गाँधी आ भगत सिंहक कथा,
आद्यांत स्वतंत्रता संग्राम
आ चाटि गेल छल अनेक रास रेवोल्यूशन
ओकर उत्पत्ति स अंत धरि

आब स्पष्ट भs गेल छलैक  
ओकर नजरि
देखा रहल छलैक
समाज मे पसरल अनेक भेद

सोचलक जे
"क्रान्ति" कर
लाठी खाय
धरना दे
जहल जायत
नहि करत चाकरी कोनो सरकारक
आ ने पकड़त
कोनो धन्ना सेठक पैर

मुदा तखनहि स्मृति
सागरक लहरि जकाँ
आबि ओकरा भिजा जाइत छैक

मन पड़ि जाइत छैक
बाबा-बाबीक सजल आंखि
माइक दवाई केर खाली शीशी
बाबूक कर्ज
बहिनक बियाह लेल
ओरियानक नाम पर
राखल मनोरथ

थम्हि जाइत अछि
राखय लगैत अछि
भारी मन सं,
चौपेति
अपनहि हाथें ईस्त्री कयल “क्रान्ति”

Saturday, June 15, 2013

जीवन-मृत्यु

की थिक जिनगी, मृत्यु कथी थिक, के ई बूझि सकल अछि
जिज्ञासु मन हमरा सं सदिखन ई पूछि रहल अछि 

के छी  हमसब, किए अबै छी ,
                              जे करैत छी , किए करै छी
किछुए दिन छी, मर्त्यलोक में ,
                             प्रतिदिन ओहि लय किए मरै छी
एहि जिनगी केर बाद कथी थिक , क्यौ की देखि सकल अछि
जिज्ञासु मन हमरा सं....


ईश्वर छथि  त ' कत ' रहै छथि
                               किए ने सबहक कष्ट हरै छथि
मुदा ने छथि संसार एते टा
                              कहू तखन जे के चलबै छथि
प्रश्न शिथिल कयने जाइत अछि, किछु नई सूझि रहल अछि
जिज्ञासु मन हमरा सं....


एही गुनधुन में हम मातल 
                              मूर्ख अपन हम जिनगी काटल 
पैघ लोक सब बड़ ज्ञानी सब 
                              मानल हम छी बेकूफ छाँटल
मुदा निरुत्तर सबठाँ सं कविमन ई घूरि चुकल अछि  
जिज्ञासु मन हमरा सं....

Tuesday, June 4, 2013

सुनल नबको ई मंत्री जी चोर एलैए...

फेर मंत्री के फेरबदल थोड़ भेलैए
सुनल नबको ई मंत्री जी चोर एलैए

सतत मैडम जी, सर जी अनघोल केने छै
सीट पाँछा स' अप्पन ई मोल लेने छै
तें एहि  बेर कपाड़क ई जोर भेलैए
सुनल नबको

कांड एतबे नै सुनू सुनूँ और केने छै
जहल जयबा केर सेहो ई मौज नेने छै
मुदा बोली में जीत गेलै, शोर भेलैए
सुनल नबको

आब कहिया धरि चलतै ई घुघुआमना
कहू उठबई नै  देश तखन बांचत कोना
आंखि फोलू दुनू आब भोर भेलैए
सुनल नबको

Friday, April 19, 2013

ग़ज़ल (जकरा जतबा लहि जाइत अछि )

22 22 22 22
किछुओ संगे नहि जाइत अछि
एहीठां सब रहि जाइत अछि

हम कतबो किछु लीखी तैयो
कागत सादे रहि जाइत अछि

जतबा जे किछु सुख अरजल से
नोरे संग सब बहि जाइत अछि

कतबो पैघ महल हो एक दिन
समयक आगाँ ढहि जाइत अछि

कतबो सुमिरन करी, प्रार्थना
आब ओतय धरि नहीं जाइत अछि

आई समय ओकरे होईत छै
जकरा जतबा लहि जाइत अछि


हम कि लिखू

कखनो क' हमरा नहीं फुराइत अछि
कि लिखू
लिखबा में कलम थरथराइत अछि
कि लिखू

हम लोकक झगड़ा दान लिखू
की हृदयक अपन बखान लिखू
वा अपना लोक कें आन लिखू
फूसिए ककरो गुणगान लिखू
हम कि लिखू

हम राजनीति कें भ्रष्ट लिखू
महगी स' जनता त्रश्त लिखू
फूसिए अपना के व्यस्त लिखू
वा सबहिक मन कें कष्ट लिखू
हम कि लिखू

हम प्रेम लिखू कि घृणा लिखू
सुख़-दुःख एक्कहि रंग कोना लिखू
फुसिए ककरा झुनझुना लिखू
अनका मन स' हम कोना लिखू
हम कि लिखू 

Wednesday, November 9, 2011

दुनियादारी नहि बूझि सकल ........

एक दिन हमरा छल भेट भेल
संसारिक आपाधापी मे रहितहु
ओहि स निश्चिंत,
सुगमता स जीवनपथ पर चलइत
अजगुत स्वभाव केर धनी
एकटा लोक तेहन
जकरा देखितहि ई भेल
कल्पना यैह रहल हेतनि भगवानक
मानव रचनाकाल 

निश्छल,पवित्र छल गाय जेकाँ
कोमल हृदयी छल माय जेकाँ 
ओ निर्मल छल निर्झर जल सन 
व्यक्तित्व समूचा दर्पण सन 

ओ शांत सुदूर देहात जेकाँ 
उपियोगी केरा पात जेकाँ 
ओ पावन चारू धाम जेकाँ 
आ मीठ स्वभावे आम जेकाँ 

नहि ओझरायल जट्टा सन छल 
नहि मधुमाछिक छत्ता सन छल 
नहि धूर्ते छल सियार जेकाँ 
नहि निष्ठुर पूषक जार जेकाँ 

अपना कें सधने, योगी छल 
दुनियाक नजरि में रोगी छल 
सदिखन सबठा सत्कार करय
निस्वार्थ सभक उपकार करय  

बस एक्कहि टा छल एब मुदा,
नहि अर्थ प्रतिष्ठा लूझि सकल 
दुनियादारी नहि बूझि सकल  

Thursday, May 26, 2011

आऊ राष्ट्र निर्माण करी...

अपन अपन क्षमता के परखू ,
अनकर सब सम्मान करू, आऊ राष्ट्र निर्माण करू....

कहिओ सोचल बालक नरेन्द्र सँ कोना विवेकानंद भेला 
ध्यान देल कहिओ जे गाँधी कोना महात्मा बनि सकला 
कहिओ विचार ई आयल कोना, किछु नाम अमर इतिहास बनल 
कहिओ ई मन में भेल , कोना ध्रुव अपन बात पर अडिग रहल 
अपनों सब ई क' सकैत छी, 
जँ शक्ति अपन आह्वान करी, आऊ राष्ट्र निर्माण करी....

ई देश सतत भ्रष्टाचारक अति घृणित रोग सँ ग्रसित रहल 
जकरा लग अछि सामर्थ्य, विभव से अपने ताले नचैत रहल 
जनिका पर छनि नेतृत्व भार से अपने रोटी सेकलनि  अछि 
आ जनिका पर दारोमदार से बैसि तमाशा देखलनि अछि 
की ककरो नहीं एतबा पलखति,
जे देश अपन अछि ध्यान करी, आऊ राष्ट्र निर्माण करी....

एकसर ताकत की क' सकैत अछि, आई हजारे* देखा देलनि
फेर अलख ओ राष्ट्र भावना केर मानस में जगा देलनि 
जागू आबो संकल्प लिय' ओ राष्ट्र धर्म निर्वाह करू 
ई देश अपन अछि डगमगाइत ज', मिली जुली सब क्यौ ठाढ़ करू
मुदा ताहि सब सँ पहिने 
अपना चरित्र निर्माण करी , आऊ राष्ट्र निर्माण करी....
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हजारे- अन्ना हजारे 


Wednesday, May 11, 2011

फगुआ-२

फगुआ में मुंह रंगायल तेहन सब लागि रहल छी 
जे चिन्ह्बा में देखबा सँ' नहि क्यौ आबि रहल छी 
मुदा कहू कहिया मनुक्ख चिन्ह्बा में आयल 
त' रंग अबीरक दोष किय' हम मानि रहल छी 

फगुआक नाम पर संगी सबकें भिजा देलहुं अछि 
कतेक बाल्टी पानि आइ सब हेरा देलहुं अछि 
मुदा कहू की नहि अकारणो नष्ट करै छी 
त' किय' दोष फगुआक माथ पर मढ़ी रहलहुं अछि 

बड़का-बड़का बोतल राखल सबहक दलान पर 
सब खा-पी क' अछि टुन्न भेल फगुआक नाम पर 
मुदा कहू पदवीक नशा की नहि रहैत अछि 
तखन किय' आक्षेप कहू पावनिक शान पर  
अपना प्रवित्ति में नहि सुधार क्यौ आनि रहल छी 
रंग अबीरक.................

फगुआ-१


कत्त' जा रहलहुं अछि बौआ 
हुडदंग हेतई बाहर में, पुछि देल्थिन माय ओकर 
जखन-२ निकली हम टोकब जरुरी छौ,
होली छै,
संगी सब संगे हम रंग खेला फेरो त' 
घूमि-घामि एही ठाम आयब ने 
खिसिया क' बाजल ओ 

बेसी नहीं दूर जायब,
छौंड़ा सब पी-पा क' घुमैत रहैत छैक 
सड़कहिं पर मारि-पीट करैत रहैत छैक 

बड़बड़ाइत  मनहि मन, ठीक छै, ततबा कहि
झट मोटरसाईकिल उठा , विदा भेल जल्दी सँ
गाड़ी सँ' नहि जाऊ, माय फेर टोकि देल्थिन 
मुदा एतेक सुनबा केर फुर्सति कहाँ ओकरा,
अपनहि टा सुनलनि ओ 

ईम्हर बाबू साहेब, अयला संगी सब लग   
ओहि दिन के छोडितनि?
रंग आ अबीर सँ' शरीर हिनक रंगा गेल 
जाबत धरि बुझबा में अबितनि  किछु 
ताबत धरि हरियर आ पीयर सँ देह-हाथ सना गेल 

होली है, होली है, सस्वर चीत्कार भेल 
तकर बाद किछु बोतल मुंह में ढरा गेल 
नाच गान सेहो जरूरी एहि अबसर पर 
अनका हो दिक्कत त' हिनका की ताहि सँ' 

एखन नब शोणित अछि 
खयता नहि, पीता नहि, नचता नहि एखने 
त' ई सब की होइत छै बुढ़ारी में ककरो सँ' 

नचबा केर बाद छलैक, प्लान कतहु घुमबा केर 
एक्कहि टा गाड़ी छल सेहो दुपहिए टा 
ताही पर चारि गोटे, ककरा परवाहि मुदा ,
ततबे नहि बैसल सब ओही पर जुआने जखन हो 
आ स्पीड गाड़ी के सय सँ' ज' कम हो 
त' सम्मानक क्षति नहि ई? 

सा रा रा सा रा रा सब क्यौ गबैत ,
बात हनुमानक बाबू सँ सब क्यौ करैत 
पीने मदमत्त जेना हाथी बताह कोनो 
तेजी सँ अनढनायल कत्तहु जा रहल छलाह 

की तखने भ' लटपट हाथ हैन्डिल सँ छूटि गेलनि
आ ट्रकक समक्ष ई गाड़ी छल आबि गेलनि 
ट्रक त' निपत्ता भेल ,
आब मात्र सड़क छल 
गाड़ी छल,
ई चारू सड़क पर 
आ एक्कहि टा रंग जेना सब ठाम छल पसरि गेल....


Tuesday, November 30, 2010

हम इंटरव्यू लेल छी तैयार....

हम इंटरव्यू लेल छी तैयार....

सूट-बूट पर टाई लगा, हम इत्र समूचा आई लगा
आ ल' प्रमाण-पत्रक भंडार
इंटरव्यू लेल छी तैयार.......

हम सतत वर्ग में प्रथम केलहुं
नाटक गायन में भाग लेलहुं
हो भाषण व हो चित्रकला
सब में हम शीर्षे पर रहलहुं
अपना पर नहि तखनो प्रतीति 
सब कहइत अछि चिंता बेकार
हम छी इंटरव्यू लेल तैयार........

हर इंटरव्यू में फेल भेलहुँ अछि
ओकरा सब लेल खेल भेलहुँ अछि
सबठा, सदिखन भेड़िया-धसान में
हम बस ठेलम-ठेल भेलहुँ अछि
कोनो बेर लहबे करतै
माँ कयने अछि कबुला हज़ार 
हम छी  इंटरव्यू लेल तैयार........

दाढ़ी संग मोछो कटा लेलहुं
हम टाई ठोंठ में सटा लेलहुं
चमचम जूता, उज्जर बुशर्ट
पर कारी पैटो  सिया लेलहुं
ताहू पर स' औ छाटि देत
ज' नहीं छोड़बै  मुस्की फुहार
हम छी  इंटरव्यू लेल तैयार........

सय टा कुल सीटक बात छैक
ओहि पर हज़ार केर हाथ छैक
कतबो हम आगाँ रही पांति में
किछु सीट भी.आई.पी. कात छैक
एहि बेर मुदा संकल्प कयल
कोनो बाधा हो करब पार........
हम छी  इंटरव्यू लेल तैयार........

Saturday, October 23, 2010

कि आब हम सुरक्षित छी?

एक दिन हम बाट भटकि पहुंची गेलहुं जंगल में
छोट, पैघ, ठुठ्ठ, लदल सब तरहक गाछ छल 
सनसनाइत हवा संगे सरसराइत पात छल 
चिडै सबहक चीं चीं केर मद्धिम आवाज़ सेहो

हर्ष संगहि विस्मय भेल प्रकृतिक सुन्दरता पर
आह! कतेक सुन्दर अछि अंतर्मन बाजि उठल
मुग्ध भेल, मग्न भेल, अपलक ओहि दृश्य केर रहलहुं तकैत हम
कि एकरो मेटा देतै ?
क्रुद्ध भेल मन लोकक मानसिक दुर्बलता पर

कोना क्षणिक सुख भरि लेल
नष्ट-भ्रष्ट क दैत अछि यत्न स बनाओल गेल ईश्वर केर चित्रकला

कोना अपन सोफा,पलंग,आलमीरा लेल     
छिन्न-भिन्न क दैत अछि, ईश्वर प्रदत्त ओहि औषधि संसार कें

कोना अपन स्वार्थ सिद्धि कहुना करबाक लेल
आन कोनो प्राणी केर जीबा केर
अधिकारो छीन लेल जाइत छैक

ई सब विचार सोचि मन छल अशांत भेल
बैसि गेलहुं माथ टिका गाछक वात्सल्य में,
ताबत धरि सब अरण्यवासी कें ज्ञात भेलनि,
जे जंगल केर बाहर सँ आयल
दू पैर बला फेरो अछि पशु कोनो

घेरा गेलहुं हम चहुँओर जीव-जंतु सँ
किछु समयावधि बाद अपन आंखि जखन फोलल हम
देखल जे दृश्य प्राण उपरे अटकि गेल
जतेक क्रोध,चिंता छल भीतरे सटकि  गेल
हजारो प्रकारक छल, संख्या त' लाख में
हमर प्राण अटकल छल यमराजक हाथ में

प्रानघ्न पशु सब छल अगिले कतार में
प्राणक एक डोरी छल भगवानो हाथ में
तें कबुला-पाती केर सूची तैयार कयलहु
डरें छल आवाज़ बंद तखनो चीत्कार कयलहु

चौकी सँ खसि पड़लहूँ, धम्म ड़' आवाज़ भेल
आंखि हमर फ़ूजि गेल, नींद सेहो टूटि गेल,
फक्क द' क' सांस छुटल
आब हम सुरक्षित छी
मन में उसास भेल 
मात्र एक स्वप्न छल  ई से तखन ज्ञात भेल

मुदा एक प्रश्न उठल अगिले क्षण मन में
कि आब हम सुरक्षित छी ?
कि सत्ते सुरक्षित छी?